IMD Weather Update – देश में इन दिनों मौसम का रंग-ढंग तेजी से बदलता नजर आ रहा है। जहाँ कुछ हफ्ते पहले तक सुबह की ठंडक लोगों को कंबल में दुबके रहने पर मजबूर करती थी, वहीं अब दोपहर की धूप अपना असर दिखाने लगी है। मौसम विभाग यानी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा अपडेट जारी करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों के लिए अलग-अलग चेतावनियाँ दी हैं। इस मौसमी उठापटक ने आम नागरिकों से लेकर किसानों और मछुआरों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने देश के दक्षिणी हिस्सों में मौसम को अस्थिर बना दिया है। मौसम विभाग के अनुसार हिंद महासागर और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र बन गया है। अगले चौबीस घंटों में यह क्षेत्र श्रीलंका की दिशा में खिसकने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही एक और निम्न दबाव की पट्टी बनने से वातावरण में अस्थिरता और बढ़ गई है।
इस मौसमी हलचल का सबसे पहला और सीधा असर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर पड़ने वाला है। मौसम विभाग ने 21 फरवरी को इस द्वीप समूह में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। समुद्री इलाकों में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। द्वीप के निवासियों को एहतियात बरतते हुए सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
22 फरवरी को दक्षिण तमिलनाडु और केरल में तेज आँधी के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इन राज्यों के कुछ हिस्सों में झमाझम बारिश के साथ-साथ बिजली कड़कने और तूफानी हवाओं का भी अनुमान है। तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार सामान्य से कहीं अधिक रह सकती है, जिससे समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठने की आशंका है। इस स्थिति को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की कड़ी चेतावनी दी गई है।
तमिलनाडु और केरल के मछुआरों के लिए यह अलर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो मछुआरे पहले से समुद्र में गए हुए हैं, उन्हें तुरंत किनारे पर लौट आने की सलाह दी गई है। तटीय सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें समुद्री इलाकों में निगरानी रख रही हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दल भी तैयार अवस्था में रखे गए हैं।
उत्तर भारत की बात करें तो 23 फरवरी को हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तराखंड के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है, जहाँ पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। इन राज्यों में यात्रा करने वालों को सड़क की स्थिति और मौसम का पूर्वानुमान जाँचने के बाद ही सफर पर निकलने की सलाह दी जाती है। पहाड़ी रास्तों पर फिसलन की संभावना को देखते हुए वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले सात दिनों के भीतर अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। पूर्वी भारत में भी तापमान में लगभग तीन डिग्री की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। ठंड की विदाई और गर्मी के आगमन का यह संक्रमण काल आमतौर पर शरीर के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान सुबह की हल्की ठंडक और दोपहर की तेज धूप एक साथ महसूस होती है, जिससे सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है।
महाराष्ट्र के नागरिकों के लिए कुछ हद तक राहत की खबर यह है कि फिलहाल राज्य में बारिश का कोई बड़ा खतरा नहीं है। हालाँकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राज्य के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। इससे दोपहर के समय गर्मी की तीव्रता में इजाफा होगा और लू जैसी स्थितियाँ भी बन सकती हैं। विशेष रूप से मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र के लोगों को चिलचिलाती धूप के लिए तैयार रहना होगा।
महाराष्ट्र के किसानों को इस मौसमी बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी खेती की योजना बनाने की जरूरत है। दोपहर की तेज धूप में खेत में काम करने से बचना चाहिए और यदि करना ही पड़े तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना बेहद जरूरी है। पशुओं की देखभाल में भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें पर्याप्त पानी और छाया मिले। बुजुर्गों और बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए।
देश के विभिन्न हिस्सों में एक साथ इतने अलग-अलग मौसमी बदलाव होना यह दर्शाता है कि भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक विविधता मौसम पर कितना गहरा असर डालती है। जहाँ दक्षिण में बारिश और तूफान का खतरा है, वहीं मध्य और उत्तर भारत में तपती गर्मी दस्तक दे रही है। पर्वतीय राज्यों में बर्फबारी और बारिश की स्थिति अलग ही तस्वीर पेश करती है। इस विविधता के बीच मौसम विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक अनुमानों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से दूर रहें। किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे उचित कदम होता है। घर में जरूरी सामान, पीने का पानी और दवाइयाँ पहले से तैयार रखना एक समझदारी भरी सावधानी है। आपातकाल नंबरों को अपने फोन में सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद ली जा सके।
आने वाले दिनों में मौसम किस करवट बैठता है, इस पर पूरे देश की नजर टिकी है। गर्मी का मौसम दरवाजे पर खड़ा है और इसके आते ही पानी की किल्लत, बिजली की माँग और सेहत से जुड़ी चुनौतियाँ भी बढ़ जाती हैं। IMD लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी करता रहेगा। नागरिकों को चाहिए कि वे सतर्क रहें, सावधानी बरतें और मौसम के इस बदलते मिजाज से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।








